आया आया,
खरगोश,
सुंदर प्यारा,
नन्हा सा खरगोश,
इधर से उधर,
उछलता कूदता,
कहाँ से आया,
ये खरगोश,
पोती हमारी,
करने लगी जब,
जिद एक दिन,
पापा से अपने,
चाहिए मुझे,
खरगोश,
ला दो, ला दो,
ला दो, न पापा,
न चली पापा की,
कोई दलील,
आहना की,
जिद के आगे,
बेटी के आगे तो,
नत मस्तक,
हो जाते हैं,
प्यारे पापा,
पापा की जान,
मम्मा की प्यारी,
घर की रौनक,
बिटिया रानी,
अहाऽ अहाऽ,
पापा लाये,
खरगोश,
सुंदर प्यारा,
खुश हो गयी,
चहक रही,
सारे घर में,
बिटिया रानी,
आया आया,
खरगोश,
सुंदर प्यारा,
नन्हा खरगोश ।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर (म. प्र.)
नोट:-
मुख चित्र -मेरी पोती आहना और खरगोश,
जो आहना ने पाला है 💐

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