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सोचती हूं कभी-कभी मैं दुनिया की ये रीत हो,
धोखा ना हो हर रिश्ते में और सच्ची प्रीत हो,
लेकिन इस संसार की एक कड़वी सच्चाई है,
जन्म लेने वाले की एक दिन निश्चित विदाई है,
चाहे जितना प्यार जता लो,कर लो कसमे वादे,
एक दूजे से जुदा ना होंगे कर लो यह फरियादे,
धोखा एक सच्चाई है, यह सब के हिस्से में आई है,
राजा हो या रंक हो सभी ने यह रीत निभाई है,
जो दुनिया में आता है, एक दिन धोखा खाता है,
मृत्यु के आगे कोई भी टिक नहीं पाता है,
प्रिय संबंधी रिश्तो को धोखा दे ही जाता है,
सोचती हूं कभी-कभी मैं कैसी ये रीत बनाई है,
लेकिन यह सच्चाई है, जन्म लिया इस धरती पर---
एक दिन निश्चित विदाई है,
यह विपदा तो इस धरती पर, परमेश्वर पर भी आई है,
हो चाहे राम कृष्ण चाहे कबीर गुसाईं हो,
मृत्यु धोखा बन गई ,चाहे रहीम साईं हो,
जीवन काल चक्र है इससे बच नहीं पाएंगे,
प्यार वफा कितना भी कर लो, रिश्ते में धोखा खाएंगे,
सोचती हूं कभी-कभी मैं यह कैसी रीत बनाई है,
धोखा मिलना है रिश्ते में यह तो एक सच्चाई है,
जन्म लेने वाले की एक दिन तो विदाई है,
क्या करें यह जीवन की एक कड़वी सच्चाई है।
संगीता वर्मा✍✍

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