गुलाबों की महक, सूरज की रौशनी।
चुराये नहीं घटती, छुपाये नही छिपती।

दूरियां दोस्तों से हो कोई ग़म नही हमे।
दिल से यादें उनकी भुलायें नही बनती।

चाहोगे तुम की बदले हवा पानी का सामाँ।
मौसम से उनकी आदतें कभी न बदलती।

इंसान कितना भी बदल कर दिखला दे।
चाहे हो जाये बूढ़ा, फितरतें तो वही रहती।

सरकार के दफ्तर में किये काम के बाद भी।
बाकि ज़िन्दगी भी अफसरी में ही गुज़रती।



              फिरोज दहिवाला