कड़ियाँ जोड़ -जोड़ कर 
बनती है साईकिल का चैन


चैन के उतरते ही 
नही चलती है 
साईकिल


बार -बार प्रयत्न करते है
चैन चढाकर चलने की


सेट होते ही
सुचारू रूप से 
चलने लगती है 
साईकिल


ऐसे ही
रिश्तों को रिश्तों से 
जोड़कर बनता है 
परिवार

रिश्तों मे खट्टास 
आ जाए तो 
जीवन मे चैन नहीं होता 

  मन के अंँदर
आते -जाते विचारों का
बवंँडर मचा रहता है

वैसे ही 
मन का मैल साफ होते ही
जिंदगी सुचारू रूप से
चलने लगती है


               शिल्पा मोदी✍️