"श्याम सलोना सुन्दर बालक,
जनक उपवन में आ गए।

देख आलोकित तेज,
रूप गंधर्व निश्छल,
तिलक चंदन भाल पर,
कांधे तीर धनुष शोभे,

जनक पूरी में शोर मचा।
देखन आए नर नारी।
मंत्र मुग्ध हो भाव विभोर
सोच रहे वक्त ये थम जाये।

पूछन लागे नर-नारी,
कौन हो तुम? किस लोक से,
इस धरा पर तुम आए।

दशरथ नन्दन राम-लखन
अवध पूरी निज धाम।
देख अद्भुत पुष्प वाटिका,
सोचा करुँ यही विश्राम।

जनक पूरी में शोर मचा।
श्याम वर्ण अनमोल रत्न,
दशरथ नन्दन राम-लखन
जनकपुर पहुँचे धाम,
धन्य-धन्य भाग मिथिला धाम।

बहनों संग जनक दुलारी
पुष्प वाटिका चली,
देख राम-लखन जी
हृदय पुष्प खिले,
देख राम जानकी को संग,
पुष्प वाटिका झूम उठे।।

नाचन लगे मोर-पपीहे
तितलियों के मधुर रंग
गूँज उठी बन कर तरंग।

नज़र झुकाए खड़ी जानकी।
राम निशब्द निहार रहे।
दसों दिशाओं झूम-झूम कर,
राम जानकी की नज़र उतार रहे।।"
                   अम्बिका झा 👏