निद्रा गहरी
स्वप्न में वृन्दावन नगरी
श्याम अलौकिक छवि
सुंदर चितवन
कमल नयन
गठीला बदन
कस्तुरी तिलक
मोर मुकुट
वैजयंती माल
अधर मंद मंद मुस्कान
मधुर बाजत बांसुरी
कटि पिताम्बर
घुंघरू झनकार
ठुमक ठुमक चलत सांवरे सरकार
झटपट नटखट
कभी पनघट
कभी यमुना तट
दाऊ संग ग्वाल बाल
खेलत है नंदलाल
दर्श पाकर गदगद महाकाल
फोड़े मटकी
खाए माखन
गोपियों संग होली खेलें कान्हा उड़े गुलाल
आहा हर्षित मन गूंजे धमाल
असुर मृदन
राधा मिलन
मधुर रास
प्रेम रस
धन्य धरा
गोपी बन पधारे शिवशंकरा
आहा मनमुदित
आहा सुंदर संगीत
आहा रोम रोम पुलकित हर्षित
आहा राधामोहन मिलन
ना खोलूं नयन
ना खोलूं नयन।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना"🙏🙏💐💐

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