आरती की आंखों में आंसू रुक ही नहीं रहे थे आरती का पति डॉक्टर का चक्कर लगाकर थक चुका था। देखिए आपकी पत्नी का ऑपरेशन हो चुका है अब मैं कुछ नहीं कर सकता इनका शरीर रिस्पांस नहीं कर रहा है हाथ पैर तक नहीं हिल रहे हैं। पर डॉक्टर साहब आपका बहुत नाम सुना था सर प्लीज जाइए डॉक्टर ने असिस्टेंट को कहा इन्हें ले जाए उनकी पत्नी 6 महीने से ज्यादा नहीं जी सकती। असिस्टेंट ने समझाते हुए कहा डॉक्टर साहब ने जितना बना इलाज किया अब तो भगवान के हाथ में हैं डॉक्टर साहेब भगवान थोड़ी हैं ‌। बड़ी मायूसी के साथ पत्नी को व्हील चेयर पर बैठा हॉस्पिटल के बाहर टैक्सी बुक करके पत्नी को बैठाकर बातें करने लगा। बेटा रोने लगा मम्मी अच्छी भली थी अचानक इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई बस थोड़ी छोटी सी एक्सीडेंट ही तो थी ब्रेन में चोट लगने के कारण डॉक्टर ने इलाज भी कर दिया पर गारंटी नहीं दिया।आपको ऑपरेशन करवाने नहीं चाहिए था पापा देखो ऑपरेशन के बाद मम्मी का हालत और भी खराब हो गया है पहले तो थोड़े बहुत हाथ हिल भी रहे थे अब तो धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया है। बेटा इसमें हम लोग क्या कर सकते हैं डॉक्टर भी भगवान थोड़ी हैं। घर में आने के बाद आरती को बेड पर पड़े पड़े आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। आरती की बहू फोन पर बोल रही थी मांजी अब ज्यादा दिन नहीं बचेंगी उनको   देखकर लगता है छः महीने क्या यह तो 15 दिन में ही दुनिया से अलविदा ले लेंगी। उधर उसकी दोस्त बोल रही थी अच्छा है तेरी सास के व्यवहार से तू कितना दुखी रहती है। आरती के कानों में जब यह शब्द सुनाई पड़ी तो उसकी आंखों से और भी आंसू निकलने लगे मन ही मन कहने लगी हे भगवान कौन से संकट में डाल दिया आपने मैंने किसी का कुछ नहीं बड़ा संकट का समाधान करो भगवान। मैं मंदिर में आपके लिए भंडारा करवाऊंगी। रात में नींद नहीं आती बेचैनी लगा रहता सारा दिन बेचैन रहती। एक दिन आरती की बहू जब चम्मच से अपने हाथों से खाना खिला रही थी तब उसने कहा मां जी थोड़ा हाथ पैर आप चलाया कीजिए नहीं तो शरीर और भी खराब होते जाएगी। यह सुनकर आरती को झटका लगा है मन ही मन सोचा क्या मैं जानबूझकर पड़ी रहती हूं नखरे दिखा रही हूं। धीरे धीरे घर के परिवार के व्यवहार भी बदलने लगे। आरती तो पहले से परेशान थी अब और परेशान हो गई अब तो लोग मेरा मरने का इंतजार कर रहे हैं।  एक दिन आधी रात को नींद की झपकी लगी तो उसे महसूस हुआ दुर्गा माता लंबे लंबे बाल शेरों पर सवार हाथ में चक्र लिए उनके सामने खड़ी हैं और कह रही हैं बेटा तेरी अभी लंबी उम्र है तू चिंता मत कर तू आर्ट ऑफ लिविंग कर।आरती की आंखें खुल गई उसे समझ में नहीं आ रहा था वह सपना देख रही थी या फिर भ्रम था उसका सुबह होने पर उसने अपने पति को बताया पति ने मजाक उड़ाते हुए कहा जब डॉक्टर ने जवाब दे दिया। आरती ने जिद करते हुए कहा मेरे खातिर रवि शंकर जी के दरबार में चलो आरती के पति उसकी बातों को मानकर कहां जब तेरी अंतिम इच्छा यहीं है तो चलो घर वाले भी मना नहीं किया अगले दिन सपरिवार रवि शंकर जी के शिविर में गए वहां काफी भीड़ लगी हुई थी।आरती को कमजोरी की वजह से बार बार चक्कर और बेहोशी आ रहा था। रवि शंकर जी सबको आर्ट ऑफ लिविंग के बारे में बता रहे थे बता रहे थे सुदर्शन चक्र के द्वारा कैसे बड़े से बड़े बीमारी भी ठीक हो जाते हैं। डॉक्टर ने जहां मरीजों को जवाब दे दिया है वही मैंने उन मरीजों को ठीक किया है। आरती के पति आंखों में आशा की किरण जाग गई। आरती को देखकर रविशंकर  जी ने कहा चिंता करने की कोई बात नहीं है अगर हमारे सुदर्शन चक्र का और आर्ट ऑफ लिविंग का क्रिया नियमित करेंगी तो बहुत जल्दी ठीक हो जाएंगी। आरती कोखुशी का ठिकाना न रहा आशा की किरण जागी उसमें मन ही मन ठान लिया अगर मरना ही है मुझे तो फिर सुदर्शन क्रिया क्यों ना करूं शायद मैं फिर से जी सकूं।आरती रवि शंकर जी द्वारा बताए हुए आर्ट ऑफ लिविंग का नियमित क्रिया करने लगीक्रिया करने के घर में उसे बार-बार चक्कर आता और कभी कभी बेहोश हो जाती।रवि शंकर जी ने कहा बेटा छोड़ दो तुमसे नहीं हो पाएगा तुम्हारा शरीर इतना कमजोर है तुम सुदर्शन क्रिया नहीं कर पाओगे। आरती ने कहा मैं अपना खान-पान ठीक करके और आपका सुदर्शन क्रिया रोज करूंगी चाहे मुझे चक्कर आए या फिर मैं भी बेहोश होजाऊं।रवि शंकर जी उसकी हिम्मत को देखकर ताज्जुब करने लगे कुछ साल बाद उस में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। आरती आज के दिन में अपने पैरों के बल चल रही है फिर रही है और इस घटना को 17 साल हो गए। उसने कहा सुदर्शन क्रिया करके मैंने मौत को भी पीछे छोड़ दिया । दुर्गा जी की मेरी असीम कृपा हुई जो मुझे सपनों में आकर बताया । मैं रवि शंकर जी की कृपा से ही ठीक-ठाक हुई।.... 


                       सपना कुमारी 
                       बिहार पटना