मै झरना हूँ
अनवरत बहना जानूँ
पहाड़ों ,पेड़ो से टकराकर
स्वयंँ का पथ बनाकर 
निरंँतर बहना जानूँ

मै झरना हूँ
ऊँचे तट से गिरती हूँ
निर्भय होकर सर्वदा बहती हूँ
धरा पर गिरकर
सौंधी -सौंधी मिट्टी की 
खूशबू फैलाती हूँ

मै झरना हूँ
दिवाकर की किरणें पड़ते ही
हीरे की भाँति चमचमाती हूँ
मै कल -कल, झर-झर
बहती  नदीयाँ की धारा
शीतल -शीतल जल से
प्यासों की प्यास बुझाती हूँ



मै झरना हूँ
श्वेत उज्जवला सी मेरी काया
मुझे निर्मल स्वच्छ ही रहने दो
प्रकृति की अनुपम छँटा हूँ
जीवन मे सभी को प्रेरणा देती हूँ
राहों मे आए कितने भी मुश्किले
निरंँतर साहस से बढ़ते रहना।

शिल्पा मोदी✍️