पाया जो मैंने साथ तुम्हारा
प्रीति के बंधन बंध गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
तुम्हारे प्रेम की ओंस गिरी तो
मैं सुमन सी पुलकित हो गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
मांग भरी सिंदूरी तुमने
सौभाग्यवती मैं हो गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
कुमकुम माथे पे सजाए पिया
सौंदर्य की मूरत बन गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
कजरे संग नैनों में तुम्हें बसाया
लाज से पलकें झुक गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
मंगलमाला धारण करके
मैं सुहागन बन गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
रचाई तुम्हारे नाम की मेहंदी
साँसों को सुरभित कर गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
चूड़ी खनकाकर तुम्हें पुकारूँ
शर्मीली से चंचल हो गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
बिछिया पहनी,पायल छनकाई
हर पल में मधुरता घुल गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
इस जनम का बस नहीं साथ हमारा
हर जनम तुम्हारी हो गई रे
जीवन में जैसे वसंत आ गया
मैं वासंती हो गई रे
– प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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