आँसुओ का इतना गहरा ।
रिश्ता क्यू है आँखो से।
कि ज़रा सी तकलीफ आँखो ने देखी ही।
कि फौरन बाहर आकर सामने खड़े हो जाते है।

आँसु क्या आए सामने ।
आवाज़ भी रूक रूक कर साथ देने लगी।
दिल तक तो दर्द पहुँचे इससे पहले ।
मुँह से आह निकलने लगी।

जिस्म से सांसों का रिश्ता बहुत निराला। 
क्यु देखकर तड़प एकदूजे की।
जिस्म हुआ बेजान और ।
सांसे भी ठहरने लगी।

इस जन्म मृत्यु के मोह में। 
आत्मा भी तड़प जाती हैं। 
जाने ये कैसे रिश्ते है। 
हर बार रूह यहीं ठहर जाती हैं। 

जानें कब खत्म होगा ये इन्जार। 
हवाओं का रूख बदलने का।
इस शरीर बदलने की आवाजाही में। 
कहीं भगवान भी साथ ना छोड़ दे ।
इस आत्मा रूपी परवाने का। 

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹