कुछ काले दिन इतिहास में ऐसे होते हैं जिनको हम चाह कर भी नहीं भुला पाते,
ऐसा ही एक भयावह दिन था 13 अप्रैल 1919
असंख्य लोगों ने अपनों को खोया और वह जख्म आज तक नहीं भरेः
मगर एक देशभक्त बच्चा ऐसा था जिसने यह सब चुपचाप सहना स्वीकार नहीं किया।
वह था शहीद उधम सिंह
वैसे तो स्कूल के समय में, जलियांवाला बाग देखने का अवसर मुझे मिला है। बचपन में माता-पिता के साथ भी गए, लेकिन उस भीड़ भाड़ में चलते-चलते भागते दौड़ते।
2016 साल था जब हम परिवार के साथ जलियांवाला बाग देखने गए थे। और ठीक मार्च में उन्हीं दिनों वहां उधम सिंह के बारे में पूरी जानकारी मुझे जलियांवाला बाग में पढ़ने को मिली, सारे डाक्यूमेंट्स सब कुछ रखा हुआ है। कैसे वह पढ़ रहे थे, लंदन जाने के लिए पैसे बचा रहे थे, कहां-कहां नौकरियां की कैसे-कैसे गए सब कुछ...
बचपन में बच्चों को अवश्य ऐसी जगह पर ले जाना चाहिए ताकि उनको प्रेरणा मिले लेकिन मेरा अनुभव है कि एक बार बड़े होकर हमें जरूर जाना चाहिए ताकि हम बहुत कुछ जो छूट गया था उसे दोबारा से सीख सकेंः
क्या कोई कल्पना कर सकता था उधम सिंह जो स्वयं एक अनाथ था, उसने हजारों अनाथ हुए बच्चों का बदला लिया होगा, बड़े होकर
क्या एक अनाथ बालक के लिए यह संभव था कि देश स्वतंत्र भी नहीं था और वह लंदन में पहुंच जाए।
आप जानते हैं उधम सिंह ने जब यह जलियांवाला कांड अपनी आंखों से देखा था तो वह बहुत छोटे थे और इस छोटी सी उम्र में उन्होंने ठान लिया था कि वह बड़े होकर बदला जरूर लेंगे। अब उसके लिए उन्होंने क्या कुछ नहीं किया, जी तोड़ मेहनत की खुद को पढ़ाया, लिखाया, नौकरी यहां वहां जहां मिली थी और सबसे बड़ी बात बदले की वही आग, वही देशभक्ति सालों साल उनके हृदय में जलती रही।
जीवन में कितना ही बड़ा दुख क्यों ना हो हम अपना ही दुख भूल जाते हैं समय के साथ।
जनरल डायर को मारना है उनके जीवन का उद्देश्य था। 1934 में वह लंदन जाकर रहने लगे पढ़ाई लिखाई के लिए और 13 मार्च 1940 को 'रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी' की लंदन के 'काक्सटन हॉल' में बैठक थी। इस बैठक में डायर को शामिल होना था ।उधम जी भी वहां पहुंच गए। जैसे डायर भाषण के बाद अपनी कुर्सी की तरफ बडा। किताब में छुपी रिवाल्वर निकालकर उधम सिंह ने उस पर गोलियां बरसा दी मौके पर मौत हो गई। वहीं खड़े रहे भागे भी नहीं, जैसे उनके जीवन का यही एक मकसद था और कुछ हमको चाहिए ही नहीं और उन्हें पकड़ लिया गया। मुकदमा चला था और 31 जुलाई 1940 को वीर उधम सिंह को फांसी दे दी गई।
ऐसे थे हमारे भारत मां के सपूत जो शहीद होकर भी लोगों में देशभक्ति की ज्योति जगा गए।
13 मार्च के ऐतिहासिक दिन पर उधम सिंह जी को कोटि-कोटि नमन🙏
वंदना शर्मा🖋️

0 टिप्पणियाँ