क्या हुआ बच्चा ,ऐसै क्यू देख रही हो,पानी का घूट भरते हुऐ,नीरु से पूछा चन्द्रेश ने""""""
नही कुछ नही बाबा ,ऐसे ही,नीरू के गालो को थपथपाकर
चन्द्रेश सिढियों की ओर बढ गया,
अचानक वो ठिठका,हरिया काका,,,जी मलिक हरिया दौडकर आया,
बच्चो को खाना खिलाकर , सुला देना""""
जी हरिया काका बोले"""""""""
नीर के लिऐ बाबा का रुप हटकर था ।क्या बाबा भी बदल गयै,वो मन ही मन सोच मे पड गयी""":"
हरिया दादा,बाबा बदल गये है,,,,नीरु हरिया से बोली,
नही बेटा,ऐसा नही है"""""::
चन्द्रेश हवेली की पाचवी मजिंल पर पहुँच गया"बरबस उसकी नजर ,हवेली ,के पीछे बने ,क्वार्टर की ओर चली गई"
कुछ आवाजे,आ रही थी"
सूरज डूब गया था,और उसकी ,ललिमा भी स्याह रात मे तब्दील हो रही थी""""""
आज कितने सालो बाद ,चन्द्रेश अपनी पंसदीदा ,जगह पर
बैठा था !
टेरिस के ऊपर बनाया गया चबूतरा ,कंक्रीट का,दमयंती की यादो मे खोया उसे पता ही न चला ,रात कितनी हो गई ""
मलिक """"
मलिक """"
हरिया की आवाज तो जैसे ,चन्द्रेश के कानो तक पहुँच ही नही रही थी"
मलिक ,,,,,,हूँ"""" चन्द्रेश बस इतना बोला,मलिक खाना निकाल दिया है"अच्छा ,हरिया काका ,यहाँ मेरे पास आओ"
जी मालिक,हरिया, चन्द्रेश के नजदीक चला गया""""
यहा़ बैठो ,मेरे पास "जी मलिक""""""
हरिया काका,,,=आपको पता है,दमयंती मुझे अकेला छोडकर ,चली गई""उसके पीछे मैने,सबको छोड दिया"
और वो मुझे छोड गई"""""
और चन्द्रेश ने हरिया काका का हाथ मजबूती से पकड लिया,"":""उसकी आँखो से असुँओ का सैलाब बहने लगा"
मालिक,हरिया की आँखे,सजल हो गई,,,उसका गला भर्रा आया,मालिक खुद को सम्भलो"""""
हरिया.काका मै यहाँ वापस क्यू आया हूँ ,माफी माँगने"
और दमयंती की अखिरी इच्छा थी "दोनो बच्चे दादा दादी के पास रहे,,,=मालिक बहूरानी बहुत अच्छी थी"""
हरिया ने बात बदली,,,,,
कुछ देर की चुप्पी के बाद""""मालिक चलो"कुछ खा लो
हा चलो,""""""
हरिया काका आज चाँद नही निकला""«
नही मलिक ,आज अमावस्या है,,,,,,
आप चलो हम आते है "ठीक है""""""हरिया के जाते ही,चन्द्रेश "भी नीचे जाने वाली"सीढियों की ओर बढ गया"
अभी पहली सीढी पर कदम रक्खा ही था,की उससे कोई टकराया,कुछ मिली जुली आवाजे उसके कानो मै सरगोशी कर गई """":::
रीमा ठाकुर 🙏🏼🙏🏼🙏🏼✍️🏻✍️🏻✍️🏻✍️🏻
प्रिये पाठको आपसे अनुरोध है 🙏🏼कहानी पढने के बाद कमियाँ से अवगत कराऐं आभार🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼


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