दिल को सुकून दे, 
ऐसी विचार रखती हूँ! 
मर्यादा में रहकर ही, 
जीवन पथ पर बढ़ती हूँ! 

कहीं मेरी बातों से किसी को, 
चोट ना पहुँच जाए, 
इसलिए, जीवन को, 
संयत भाव से जीती हूँ!! 

जब खुद में चाहूँ कि , 
हर कोई प्रेम और आदर से, 
पेश आये मेरे साथ तो, 
फिर यही सोचकर दूसरे, 
को भी आदर सम्मान देती हूँ!! 

ये जीवन की आपाधापी में, 
कर सकूँ किसी की मदद, 
ला सकूँ किसी के होठों पे, 
मुस्कान, इसी कोशिश में, 
रहती हूँ!! 

                 श्वेता कर्ण!