स्वंय में स्वंय को साध -ना
यही होती है एक साधना
मन के सारे विकारों को
करके दूर एकाग्र होना
बिखरे हुए अन्तस् को
एक केंद्र बिंदु देना
साधना है स्वंय में ही
एक कामना,स्वंय को साधना
यही होती है एक साधना।
आँखों की करनी को
विवेक की लगाम देना
साधकर मन के भावों को
साकार से निराकार कर देना
जीतकर इंद्रियों को
जितेंद्रिय हो जाना है साधना
स्वंय में स्वंय को साधना
यही होती है एक साधना।
मानव का अपने मन की
सारी कामनाओं को साधकर
नियमित और संयमित हो जाना
होता है मानव का साधक ह्यो जाना
अविचिलित हुए जीवन पथ पर
तल्लीन रहना ही है साधना
स्वंय में स्वंय को साधना
यही होती है एक साधना।।
आशा झा सखी

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