विधा-मुक्त
******
मै ,कविता हूँ"
शब्दो की,प्रबलता हूँ"शब्दों की सरलता हूँ,
मै ,कविता हूँ"

कभी मुक्त हूँ"विमुक्त हूँ"कई रूप मे विभक्त हूँ"
मै,कविता हूँ"

कभी नीर हूँ,कभी पीर हूँ"रूप के अनुरूप हूँ,
मै,कविता हूँ"

कभी शब्दो की मै, धार हृँ"मै,धार का प्रवाह हूँ,
मै ,कविता हूँ"

मै ,प्रेम का रास हूँ,आत्म का प्रकाश हूँ ,
मै,कविता हूँ"

कभी दुखी मन का सार हूँ"
कभी खुशी का ,प्रवाह हूँ"
मै, कविता हूँ"

आजाद हुँ ,मुझे बाँधो नही"
मै,मन का भवार्थ हूँ "
मै' कविता हूँ।।।
 
रीमा महेन्द्र ठाकुर(लेखिका)
रानापुर-झाबुआ -मध्यप्रदेश
   भारत
*************
आप सभी आदरणीय को कविता दिवस ,की शुभकामनाऐं🙏🏼🙏🏼