फौजी के साथ में फ़ौजिन भी समर्पण करती है,
वह भी देश हित भावों का त्याग करती है।
मैने देखा है जब पति सरहद पर होता है,
एक एक पल सुबह तक अपलक रहती है,
फ़ौजिन पत्नी भी विरहा में जलती है।
रहे उसका सिन्दूर ,अमर ,रहे खनकती चूड़ी पायल,
अक्सर रातों में उठकर कभी पूजा घर में करे दुआ,
कभी नमाजों मे उसकी सलामती का सजदा करती है।
कभी बच्चे ,कभी सास ,ससुर, कभी खेत खलिहानों,
की सारी जिम्मेदारी अपने कन्धों पर रखती है,
कभी घर से,बाहर तक अकेले ही दौड़ा करती है।
मैने देखा है जब वह बस ऊपर से खुश रहती है,
कैसे शब्दों में वर्णित कर दूं उस असहनीय वेदना को,
जब फौजी पिया हो सरहद पर वो कैसे सहा करती है।
मेरी प्यारी बहन मुझसे उम्र में छोटी है ,
अदम्य साहस उसमें क्योंकि वो फौजी की पत्नी हैं,
जब भी मिले मैने देखी उसकी पीड़ा जो निशब्द हो सहती है।
देखकर अदम्य साहस फौजी का मन गर्व से भर जाता है,
मेरे घर मे भी हैं फौजी मन इठलाता है,
जब भी किसी फौजी को देखूँ सहसा जय हिन्द की आवाज उठती है,
हर फौजी पर हमें अभिमान है,
जय हिंद,जय हिंद की सेना🙏🙏
अंजू दीक्षित
बदायूं,उत्तर प्रदेश

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