मै तेरी किताब हूँ
हर पन्नों पर तेरा ही नाम लिखा है
मेरे पहलू मे बैठकर जब करते हो बाते
मै दीवानी देखती रहती हूँ सूरत को तेरी
मै तेरी किताब हूँ
स्पर्श हाथो का जब मुझ पर होता है
फूल़ सी खुशबू बनकर बिखर जाती हूँ
तेरी आगोश मे आकर सिमट जाती हूँ
मै तेरी किताब हूँ
काम मे जब तुम उलझ जाते हो
मुझे कभी नजर अंदाज कर जाते हो
मै खोई हुई अपने पन्नों को समेटती रहती हूँ
कब पलटकर मुझे पढोगे मै सोचती रहती हूँ
मै तेरी किताब हूँ
हर खबर रखते हो मेरी
समझ जाते हो जज्बातो को मेरी
ऐसे डूबकर मुझे पढते हो
मै तेरी किताब हूँ
ढाल बनकर हमेशा खड़े रहते हो साथ मेरे
हर मुश्किलो को पलभर मे आसान कर देते हो
मै तेरी किताब हूँ तू पढे ले मुझे मेरे हमदम
तेरी ये प्रीत ही तो है
जो मुझे सँवारता है नित्य नए रँगो से हरदम
शिल्पा मोदी

1 टिप्पणियाँ