सुनों जी।

बात बात यू झगड़ा ना करों। 
मैं रूठ गयी तो ।
फिर होगी कयामत।
चली जाऊँगी सात समुंद्र पार। 
फिर लगाते रहना ।
अपनी गृहस्थी की नैया पार।

बात बात पर तुम भी रूठा ना करों। 
तुम ही मेरी नैया तुम्ही मेरी खिवैया।
तुम ही मेरी पतवार हो।
ना जाना तुम सात समुंद्र पार ।
हम तो हमेशा करना चाहते है तुम्हारा दीदार।

फिर मिल दोनों लेते हैं कसम।
निभाए मिलकर हम अपना धर्म। 
इस रूठने मनाने के फेर में ना पड़े। 
जितने दिन है हमारे। 
साथ साथ मिल खुशियों में कटे।

मानकर मैं तेरी बात ।
अब ना होऊँगा नाराज।
तुम भी उठाओ ये बात आज।
मिल करेंगे घर बाहर के सारे काज़।

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
                 दिल्ली