कविताएं हो चुकी प्रसारित 
मिला मगर पेमेंट नहीं

लगता है उस सूत्रधार तक 
पहुंचा कुछ परसेंट नहीं
,

हाय हाय क्या बात में 
लगता पूरी ठेकेदारी है

बस उसको प्रोग्राम मिलेगा 
जिससे इनकी यारी है
,

हर प्रतिभा इसमें आ जाए
 यह इतना अर्जेंट नहीं

लगता है उस सूत्रधार तक
 पहुंचा कुछ परसेंट नहीं
,

चैनल खूब करे विज्ञापन
टीआरपी बढ़ाने को

सारे कवि अकु्लाये दिखते
हाय हाय में जाने को

क्यों सब वही जुगाड़ छाये
 इस पर कोई कमेंट नहीं

लगता है उस सूत्रधार तक
 पहुंचा कुछ परसेंट नहीं
*
मेरे शहर की एक कवियित्री
 इसमें इतने बार गई

एक नहीं दो नहीं चार छह
 दो दर्जन के पार गई

फोन करो तो टका सा उत्तर 
हम कोई सर्वेंट नहीं

लगता है उस सूत्रधार तक 
पहुंचा कुछ परसेंट नहीं

                 मनोज श्रीवास्तव

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