मोहब्बत में आत्मसम्मान को ठेस नहीं लगने दूंगी।
तुम छोड़ो उसके पहले मैं ही तुमसे बिदाई ले लूंगी।
मुश्किल है तुम्हें भूलाना क्योंकि कठिन इम्तिहान है।
पर आत्म सम्मान पर आंच नहीं आने दूंगी।

सजदे में सर जब झुकाऊंगी,तेरी सलामती की दुआ मागूंगी।
पर अपने ईमान को कभी नहीं गिरने दूंगी।

दर्द जब भी छलकने को बेताब आंखों से होगा।
सज़ा कर मुस्कान होंठों पर चर्चा आम नहीं होने दूंगी।
मोहब्बत की है कांटों के सेज पर बिछ जाऊंगी।
मैं तुम्हारे लायक हूं या नहीं, मुझे मालूम नहीं
पर तुम कोहिनूर हीरा हों मेरे लिए रुह में समा लूंगी।
तुम्हारे मापदंड पर खरी ना उत्तर पाईं कोई ग़म नहीं
पर आत्मसम्मान‌ से रिश्ता उम्र भर निभाऊंगी।

आंखों में आसूं या होंठों पर मुस्कान सजाऊंगी।
तुम्हारे यादों के सहारे ही अपना जीवन बिताऊंगी।

                        अम्बिका झा ✍️