छोटा सा है परिचय मेरा।
यहाँ हंसने हँसाने आई हूँ। 
स्वभाव है बर्फ सा ठंड़ा। 
मेरे साथ कोई करें ना झगड़ा। 

लेकिन कोई करें दिमाग़ खराब ।
बदतमीज़ी से करें कोई बात।
तो आग बरसाने में भी ।
मैं पीछे ना रह पाई हूँ। 

बसन्त में मैं आई इस धरा पर।
होली की बौछार लाई हूँ। 
तड़प किसी की सहन ना हो।
ऐसा दिल मैं लेकर आई हूँ। 

नहीँ हूँ मैं कोई गर्दिश का तारा।
आम गृहणी की पहचान बनाई हूँ ।
दिखाकर अपने रंग अनोखे। 
आँखो की ठंडक बरसात कहलाई हूँ। 
नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
                 दिल्ली