होली आयी रे आज, मिलकर खेलो रे गुलाल"
खुशियों की रंगोली ,छायी रे,होली आयी रे"

मचे आज है हुडदंग,बच्चे बुढे खेले संग"
न रखो मन मे मलाल ,मेरे भाई रे होली आयी रे"

आओ रंग खेलो संग"उठी मन मे है,तरंग "
भांग की मस्ती छायी रे,होली आयी  रे!

कोई न हो भेदभाव"मन मे बस हो उल्लास"
आज गले मिलो मेरे भाई रे, होली आयी रे!

नव नूतन हो त्यौहार,मिले खुशियाँ आपार"
बनो,मिलकर मिसाल,मेरे भाई रे ,होली आयी रे!

रीमा महेन्द्र ठाकुर (लेखिका)
रानापुर-झाबुआ -मध्यप्रदेश
  भारत