ओ मेरी नखरीली। 

सुन मेरी छैल छबीली।
ज़रा बाहर तो आ।
होली खेलन को आतुर। 
आ ज़रा इधर तु मुड़। 

मै नहीं तेरी बातों में आने वाली।
मै नही हूँ तेरी साली।
मै पक्की तेरी घरवाली। 
ज़रा हाथ तो लगा कर  दिखा।

उफ़ छोड़ मेरी कलाई। 
तु निकला बड़ा हरजाई।
क्यो कर दिया मुझे धोखे से नीला पीला।
मेरी चनिया चोली जो तुने भिगोई।

अब ना बोलूंगी तुझसे। 
ज़रा पीछे हट जाओ।
मै जाती हूँ झट से। 
तुम दीवानों जैसे क्यु हो भटकें। 

ना गुस्सा कर ऐसे। 
तेरे प्यार मे मै भी रंगा हूँ। 
तु मेरी प्यारी सजनी। 
सुन्दर आँखे तेरी कजरी।

ना अच्छा लगें इन आँखो में गुस्सा। 
मै तु तुझ पर कुरबान। 
जो चाहे सज़ा दे दे।
तु ही तो मेरी जान।

होली का समां सुहाना। 
दिल मेरा तेरा मतवाला ।
मुझको माफ़ करदे।
अब मान भी जाओ बाला।

ठीक है मानूंगी एक शर्त पे ।
आगे से ना करें तु ठिठोली। 
रंग अबीर-गुलाल में रंग के।
तुम धीरे-धीरे खेलोंगे होली।

माना समां होली का रंगीन। 
ना हो जाना तुम गमगीन। 
ना करोंगे झीना झपटी।
नहीं तो हो जाऊँगी मै कट्टी। 

मानी तेरी हर बात।
तुम हो मेरी गुलाबी गुलाल। 
आगे से तंग ना करूँगा ।
अब उड़ाने दे रंग अपार।

नीलम गुप्ता🌹🌹 (नजरिया)🌹🌹
             दिल्ली