विश्व गोरैया दिवस 

छोटा सा एक बगीचा, 
है घर में मेरे, 
उसमें रहती है गोरैया, 

घूम घूम कर बगीचे में, 
दाना खाये वो बगीचे में, 
छोटा सा एक...... 

लगा जासौन बगीचे में, 
रखा  पानी सकोरे में, 
छोटा सा एक......

इधर से उधर फुदकती,
चहकती फिरती गोरैया, 
छोटा सा एक......

गोरैया के घर में आया, 
छोटा नन्हा सा मेहमान, 
छोटा सा एक...... 

स्वर राग में चूं चूं करती, 
बता रही सबको गोरैया, 
छोटा सा एक...... 

छोटा सा एक बगीचा, 
है घर में मेरे, 
उसमें रहती है गौरैया ।

     काव्य रचना -रजनी कटारे 
           जबलपुर (म. प्र.)