मल्लू मछुआरा अब युवा हो गया था। और युवा होने के साथ साथ उसे अपनी जिम्मेदारी का भी अहसास होने लगा था। जिसके फलस्वरूप उसनें कुछ काम करने का सोचा।            

तो पडो़स के रामू काका ने उससे कहा कि देखो बेटा वैसे तो तुम्हारे पिता ने नशे के चक्कर में कुछ भी नहीं छोड़ा। सब कुछ बेच डाला। पर तुम्हारे पास कुछ भूमि बची है। मै सोच रहा हूँ कि क्यों न तुम वही एक तालाब बना कर मछलियों 🐟🐟
को पालो और जब बड़ी हो जाएं तब बाजार में जाकर बेच आओ। इससे तुम्हें अच्छा मुनाफा भी हो जाएगा। 
मल्लू चाचा की बात सुनकर बहुत ही खुश हुआ। 
उसे लगा जैसे भटके हुए राहगीर को किसी ने रास्ता दिखा दिया हो। 
अगले दिन ही मल्लू ने काका की बात सुनकर जमीन की खुदाई शुरू कर दी।और काफी मेहनत के बाद मल्लू ने जमीन खोद कर एक गहरा तालाब बना दिया। और अगले दिन पानी भर के मछलियाँ 🐬🐳🐡उसमें डाल दीं।
अब मछलियाँ पल कर बड़ी हो गई थीं। मल्लू शुक्रवार को हाट जाता था। तो उसने आने वाले शुक्रवार को हाट जाने की तैयारी की मछलियों🐟 को लेकर। 
अगले शुक्रवार को मल्लू ने नहा धोकर पूजा की और माथे पर तिलक लगाया। और फिर मछलियों को पकड़ने का जाल लेकर निकल पडा़। जैसे ही उसने चौखट पर पैर रखा तो उसे छींक आ गई। 
उसने कहा इसका मतलब कि आज हाट जाने का ठीक दिन नहीं है। इसलिए उसने हाट जाने का विचार अगले शुक्रवार पर डाल दिया। 
अगले शुक्रवार को वो नहा धोकर पूजा करने के बाद फिर हाट के लिए निकला तो काका ने पीछे से आवाज दी अरे मल्लू इतनी सुबह सुबह कहाँ जा रहे हो आज। मल्लू को बहुत ही गुस्सा आया कि काका ने पीछे से आवाज दे दी। आज भी लगता है शुभ दिन नहीं है काम के लिए। तो उसने फिर से काम अगले शुक्रवार पर डाल दिया। 
अब मल्लू ने फिर से शुक्रवार को जाने की तैयारी की तो वो जैसे ही घर से निकाल ही रहा था कि उसका हाथ लालटेन से टक्कराया और लालटेन नीचे गिर गई और उसका का शीशा टूट गया। औरउसने फिर से काम टाल दिया। 
उसे काका ने समझाया कि बेटा मछलियाँ बड़ी हो गई हैं तुम इन्हें बेच आओ नहीं तो पता नहीं क्या हो जाए। आगे ही काफी देर हो चुकी है।मल्लू ने हां में सिर हिलाया। 
मौके की नजाकत देखते हुए मल्लू शुक्रवार को सुबह जल्दी उठ गया लेकिन अभी अंधेरा ही था। वो अंधेरा छटने का इंतजार करने लगा। और जैसे ही दिन निकलने वाला था कि तेज बारिश शुरू हो गई। और बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। बारिश में ही काका मल्लू के पास आए और बोले बेटा बरिशा में अगर तालाब पानी से भर गया तो मछलियाँ निकल कर बाहर आ जाएगीं और तुम्हें भारी नुकसान हो जाएगा। 
मल्लू का यह बात सुनकर चिंता में पड़ गया और वो तालाब की तरफ भागा। पर उसने वहाँ जो नजारा देखा उसे देखकर उसके चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी। तालाब पानी से भर गया था और मछलियाँ बह कर खेत की तरफ पहुँच गईं। और गांव वाले खेतों की ओर भागे पर मल्लू को समझ नहीं आया कि उसकी मछलियाँ कौन सी हैं क्योंकि गाँव वालों की मछलियाँ भी बारिश में बह कर खेतों में जा पहुचीं। 
*पर पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गईं खेत*
और मल्लू को भी अंधविश्वास महगां पड़ गया। 
        -----------------
   🧡 मनु✍🏻