कोमल हाथों की 'कला' से
    कुम्हार बना रहे "मटका"
कच्ची 'मिट्टी' को पकाकर
    निर्मित साधन सजा "मटका"
कोमल हाथों की......


'नीर' सितल भर नभ में
    'ऊंधटन' प्यास बुझाये
हसिनों के कम़र से छिलककर
    मन को हर्षाये "मटका"
कोमल हाथों की......


भाव से इसके,प्रसन्न हुआ 'पंछि' भी
    चोंच में भरकर 'पानी'
पेंनी-पेंनी कोरों 'ढ़क्कन' से
    अमृत जल भर लाये "मटका"
कोमल हाथों की......




        लेखक:-विकास कुमार लाभ
                       मधुबनी (बिहार)