जिंदगी मुट्ठी से
रेत सी फिसल रही है।
एक-एक पल वह
मौत की तरफ बढ़ रही है।
समेट लो जिंदगी में खुशियां
हर पल में जी लो खुशियां।
मुश्किलों का बवंडर चारों ओर ,
जिंदगी रेत सी फिसल रही है ।
घबरा के मुसीबत से मुंह न मोड
मुसीबत गुजर जाने दे।
रेत गीली हो वहीं बैठ जाएगी।
वक्त है गुजर जाएगा।
जिंदगी यूं ही फिसल जाएगी।
दिल कह रहा है फिर भी
हिम्मत ना हार
उम्मीद की पतवार धाम
यूं ही आगे बढ़े जा
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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