निष्क्रिय
निस्तेज सी
पड़ी
जगती में
प्राण ऊर्जा सी फूंकता
यामिनी की कोख से निकल
रक्त लिप्सित नवजात शिशु सा
या
शत्रु के रक्त से रंजित
रण विजयी बीर बाल
सारथी अरुण का अनुगमन कर
विश्व विजेता सा
उदयाचल पर चढ़
विजय पताका
फहराता
किरणों के रथ पर सवार
उषा द्वारा
अगवानी किया जाता
आ रहा है
बाल रवि
स्वर्णिम स्वप्नों की फौज बटोर।
देवयानी भारद्वाज
उसायनी फीरोजाबाद

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