यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी....
माना कि "लड़खड़ाई" हुई हूं मैं, लेकिन
मैंने "संभलना" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी....
माना कि खाई हैं "ठोकरें" कई ,लेकिन
मैंने "कोशिशें करना" नहीं छोड़ा है ।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी ....
माना कि मिले हैं "धोखे" बहुत ,लेकिन मैंने "विश्वास करना" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी ....
माना कि "उदास"😞 हूं मैं ,लेकिन
मैंने "मुस्कुराना"😊 नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी ....
माना कि "अकेली" हूं मैं, लेकिन
मैंने "खुद का साथ" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी....
माना कि "जीती"(सफल) नहीं हूं मैं, लेकिन
मैंने "लड़ना" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी ....
माना कि कुछ "ख्वाहिशें" अधूरी हैं मेरी, लेकिन
मैंने "सपने देखना" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी....
माना कि अब तक "मंजिल" तक नहीं पहुंची हूं मैं, लेकिन
मैंने "चलना" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी ....
माना कि "खो" रही हूं पल पल तुझे, लेकिन
"मरने" के डर से मैंने "जीना" नहीं छोड़ा है,
"मरने" के डर से मैंने "जीना" नहीं छोड़ा है।
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी,
यूं न हंस मुझ पर ए जिंदगी।😊
प्रियंका ताम्रकार
बिलहरी जिला कटनी (म. प्र.)

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