हर सुबह की शाम होगी, सुबह से पहले रात होगी।
कोई रुका है ना ही रुकेगा, अपनी ही सब बात होगी।
खामोश जहाँ, खामोश ज़ुबाँ, ख़ामोशी है चारों ऒर।
दिल ग़म में जब डूब गया, फिर आंसू की बरसात होगी।
जिसके दिलमें प्यार भरा हो, प्यार के बदले मांगे प्यार।
बेमतलब वो दौड़ के आये, अब समझो वो साथ होगी।
मिल जाये खबर आने की उनकी, इत्तेफ़ाक़ से तार जुड़े।
जिस की तमन्ना थी कब से, दिल से कहो मुलाकात होगी।
बचपन का आलम याद है अब भी कोई बुज़ुर्ग घर आये।
दिल ये सोच कर बैठा रहे, साथ में कोई तो सौगात होगी।
रात अकेले नींद ना आये, दिल घबराये क्यों बार बार।
बिरहा की आँखों से देखो, चाँद बिना की ही रात होगी।
फिरोज दहिवाला

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