गौरा का मन शिव से मिल गया
सांवला शिव मन वस गया।
पाके शिव को वर अपना ,
गौरा का मन मगन हो गया ।
सबने देखा शिव को बिच्छू ततैया लगाए,
गौरा के प्रेम की नजर मे वो थे आभूषण सजाए,
प्रीत का एक ही है रूप वो ही।गौरा के मन वस गया।
प्रीत जिससे हो जरूरी नही वो खूबसूरत हो,
मीत मन का जो भी हो बस दिन उसका जीनत हो,
दिल को जो रास आ गया वो खुद ही खूबसूरत हो गया,
पर यह भी सच है लोग मरते हैं सीरत से जयादा सूरत पे,
कहने को कुछ भी कहें सबकी ख्वाहिश है एक सुंदर सनम की
हर दिल का दिल से ज्यादा सूरत को चाहने का चलन हो गया ।
यह तो हैं सारी लिखने की बातें हकीकत तो बस यही है,
सास को बहु चाहिए गोरी, साजन को सजनी चाहिए गोरी,
प्रिय को प्रियतमा गोरी पर जिनको दिल से मोहब्बत वो
शख्स मिलते नही , जिसने कहा हमने देखा वो नजरों का वहम हो गया है।
न गौरा सा तप किसी मन में शिव के लिए,
न शिव सा भाव किसी मन में सती के लिए,
कोई न हुआ बिछड़के वैरागी, वो रूह का इश्क,
अब रह गया बन कहानी हकीकत में खत्म हो गया है।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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