इस जहां की रीत अनोखी
प्रीत से निभानी पड़ती है
बचपन की सब अठखेलियां
घर आंगन गुड्डे -गुड़िया ,मात -पिता
भाई बहन वह प्यारा का साया
जहां बचपन बीता
खुशियों का आशियां
हर उम्मीद हर खुशी कदम कदम पर
हर खट्टी मीठी यादें जुड़ी
सात फेरे ले साजन संग
बाबुल का प्यारा घर छोड़
चली में साजन द्वार
नए सपने सजा
नए लोग संग नई दुनिया बसा
बचपन का घर छोड
नया घर बसाने चली
अपने सपनों की दुनिया बसाने चली
यादों में ना भूल पाती वह बचपन की याद
भुलाना ना मुमकिन है वह घर
बचपन की वह गलियां
यादों में मुस्कुराहट दे जाती हैं।
दिल की कलम से
मधु अरोरा

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