हर प्रतिशोध हुआ कब पूरा"
नारी की अनुपम बानी"
सौन्दर्य रस का पान करा के,
सरसता की बनी कहानी"""
शमशीरे चमकी क्षत्रियो की""
अहुति की बल वेदी पर"
पद्दामिनी का जौहर की आग"
क्षत्रियो की लिखी जवानी पर""
हर आचरण दंभ भरा है"
रक्तरंजित संस्कारो पर=
कुल मर्यादा भ्रष्ट हुआ पल"
हम सबकी नादाँनी पर""""
वचनबद्ध हो ,वचन निभाओ"
पीछे पथ को मत देखो,,,
पाप की गठरी ,सिर पर रखकर"
भटको मत ,किसी पथ पर""
जीवनी मृत्यु ,कहाँ थमी है"
लक्ष्य तीर से सा बिधां हुआ"
समर्पण का,नेह अकिचन"""
रिश्तो की मर्यादा पर!!
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रीमा ठाकर (लेखिका)
रानापुर झाबुआ मध्यप्रदेश
भारत

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