वक्त हाथों थे उसके फिसलता रहा
कर न सका वो कुछ.... और शहर
उसका धू धू कर जलता रहा...हर
इक शख्स मदद पथरों की लेने को
तरसता रहा...वो मदद के लिए किसी
को तरसता रहा..और आंखों के सामने
ही उसकी🔥आग की लपटों में शहर
उसका धधकता रहा...देखते रहना
मजबूरी थी उसकी.... पर अपनों के
मदद लिए दुआएँ वो करता रहा....
💞 मनु✍🏻

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