जल को कम न आंकिए,जल जीवन का सार।
एक दिन भी जल बिना, चले ना जग व्यवहार।
पंच तत्वों में से एक है ,जल की महिमा महान।
जल से सृष्टि उत्पन्न हुई, जल में जाए समाय।
बहाते नर जो व्यर्थ जल, बिना किसी काम।
उन जैसा नासमझ नहीं, कोई और इंसान।
एक एक बूंद को बचाकर, करिए संरक्षण जल का।
जहां जल की न्यूनता , मूल्य उसका उन्हें ही पता।
गंगा मैली न कीजिए, रखिए यमुना जल को शुद्ध।
प्रकृति के अनुपम उपहार ,को सहेजिए अंतर उर।
दैनिक जीवन में भी हैं ,जल के काम अनेक।
बिजली बनती है जल से, खेती जल से होय।
कल कारखाने में भी होते, जल से ही सब काम।
एक दिन सप्लाई न आए , त्राहि त्राहि मच जाय।
पशु पक्षियों के लिए भी, जल है अमृत तुल्य।
कई जंतुओं का निवास, है सागर सरिता नीर।
मनोरम कितना दृश्य हो, बारिश का मौसम आय।
पशु पक्षी नर्तन करें, मन भी अति प्रसन्न हो जाय।
जल को जाया न कीजिए ,रखिए जल को संभाल।
जल की न्यूनता से वसुंधरा ,जल रहित न हो जाए।
स्नेहलता पाण्डेय
नई दिल्ली

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