हो जाना चाहिए काँटो भर गुलाब जब बात मान की हो,
चुभ जाना चाहिए दुष्ट आँखों में जब बात अभिमान की हो।
तार तार कर देना चाहिए उस अस्तित्व को जो घिनौने पन से भरा,
जब बात तेरे स्वाभिमान की हो।
बिछ जाएंगे नर्म गुलाबों की तरह ,महका देंगे तुम्हारी रूह को,
बस हमें अपनाकर पूरा सम्मान तो दो।
अपने सारे रंगों को निचोड़कर तुम्हारे जीवन की बेरंग चादर,
चटकीली कर देंगे ,बस हमें भरोसे का एक अरमान तो दो।
तुम्हारे जीवन की तपती धूप को सुरमई शाम न कर दूं तो कहना,
बस हमें बादलों की उड़ान तो दो।
तुमसे है वादा सारे खार भी हम हँसके जूड़े में सजा लेंगे,
बस पाक जहनियत बाला कद्रदान तो दो।
जो मिलेगा दो रंगी फितरत रखेगा, फिर क्यों न गुलाब काँटों से भरेगा,
जो हो बस मोहब्बत से भरा साफ नजरिए का ऐसा पैगाम तो दो।
अंजू दीक्षित
बदायूँ ,उत्तर प्रदेश।

1 टिप्पणियाँ