वैसे मक्खन तो लगाया जाता हैं ब्रेड में और वह टेस्ट भी बढ़ा जाता है। ठीक वैसे ही आजकल चापलूस लोग,सामने वाले को बढ़ा चढ़ाकर बातें बना कर।मक्खन जैसे चापलूसी से अपना काम निकलवाने की कोशिश करते हैं ,और अपना उल्लू सीधा करते हैं।सामने वाला भी इतना मक्खन(चापलूसी)लगने के बाद वो भी खुश हो जाता है। लेकिन समझ नहीं पाता कि सामने वाला शख्स सही है,या गलत?? क्योंकि आजकल लोग बेवजह तारीफ करना तो दूर ,बात करना भी पसंद नहीं करते। 😀😀 दुनिया में कई तरह के लोग होते हैं वैसे ही ये चापलूस लोग होते हैं। जो सिर्फ हां में हां और ना में ना ही मिलाते हैं।उन्हे इतना तो पता होता है कि सामने वाला किस चीज से खुश होगा और बस मक्खन(चापलूसी)
लगाने की देर होती है। हर क्षेत्र में चापलूसी होती है। जिस वक्त जहां पर,जिन लोगों की जरूरत पड़ती है बस वही पर चापलूसी चालू हो जाती है।और अच्छे से मक्खन, मलाई लगाई जाती हैं।😀😀
               परंतु जिस तरह मक्खन प्रारंभिक अवस्था में रहता है, फिर गर्माहट पाकर वह पिघल जाता है। ठीक उसी तरह चापलूसी भी ज्यादा देर टिकती नहीं। उसे अपना मुखौटा उतारना पड़ता है। और सच झूठ सामने आ जाता है।इसलिए हमें चापलूस लोगों से दूर रहकर ।अपने अच्छे कार्यों में ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जो हम दूसरों को देंगे वही वापस लौट कर हमारे पास आता है,यही यथार्थ है।🙏🙏


              
                         मनीषा भुआर्य ठाकुर        
                               कर्नाटक