जब भी दिल से किसी को अपना माना
दिल खोल कर बस उसे अपना जाना
फिर भी रिश्ते अपने कच्चे हैं
चलो मान लिया हम बुरे ही अच्छे हैं
हम बुरे ही अच्छे हैं
निःस्वार्थ प्रेम को मेरे अपनो ने न पहचाना
मेरे निःश्छल सेवा को हरदम ही बुरा जाना
रहते खुद झूठ के महल में फिर भी वो सच्चे हैं
चलो मान लिया हम बुरे ही अच्छे हैं
हम बुरे ही अच्छे हैं
प्रेम त्याग और समर्पण सबकुछ तो मैंने दिया
फिर भी परिवार कहे तुमने आखिर क्या किया
है कैसे लोग यहाँ मैंने खाये रिश्तों में गच्चे हैं
चलो मान ही लिया हम बुरे ही अच्छे हैं
हम बुरे ही अच्छे हैं
मेरे कर्तव्यनिष्ठा को कहा गया औपचारीकता
मौन मेरी ताकत ,नहीं बोलने की आवश्यकता
सही गलत हमें भी पता हम नही अब बच्चे हैं
चलो मान लिया कि हम बुरे ही अच्छे हैं
हम बुरे ही अच्छे हैं
बदली हुई परिस्थिति में खुद को मैंने बदला है
दर्दीली आंखों से आंसू का गिरना अगला हैं
जान भी देकर हम न बन पाए तेरे लिए सच्चे हैं
चलो मान ही लिया कि हम बुरे ही अच्छे हैं
हम बुरे ही अच्छे हैं
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थ्रीमा विनोद साहू

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