बड़ी दुआ है,'जन्मदिन' की
जी लो अब तुम 'कर्मदिन' की
जितनी भी इच्छा है मन की 
इस दिन संकल्प करो तुम 'दिल' की 
बड़ी दुआ है......


अच्छी बात बड़ो से सिखना
सच्ची बात सभी से करना
नफ़रत के आगे 'प्यार' से जीतो
यहीं है 'प्यार' अपनों की मन की
बड़ी दुआ है......


ऐसा भाव बढ़ाओ 'जग' में
मिले मुकाम सभी के दिल में
"बेस्ट ऑफ लक" के पार,तुम हो जाओ
'तक़दीर' बदल दो,तुम खुद की मंजिल की
बड़ी दुआ है......




         लेखक:-विकास कुमार लाभ
                       (मधुबनी बिहार)