होली का हुड़दंग था
रंगों का दौर था
अबीर गुलाल ,लाल, पीला ,
नीला, हरा, गुलाबी
रंगों की बौछार थी
टेसवा के फुल महके
सजन संग सजनी की छेड़छाड़
मीठी बातों की फुहार
खेले होली
सजनी करे बरजोरी
मान जाओ सैया
दिखाओ ना अखियां
छोड़ूं ना तौह सजना
भागे क्यों यहां वहां
ना आऊं तेरी बातों में
न कमजोर ना हो अबला
रंगूगी तोहे प्रीत के रंग में प्यार
भरे प्यार के संग में
गुजिया ,मिठाई ,पकवानों के संग
प्रीत की डोर ना पढ़ने दूं कमजोर।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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