वह राह जरा घिरी घिरी
बहक रही बेवफा फिजा भी
ना देख मुडके अजनबी सी
जिन्दा हुयी है लाशे बहार की
भूली बिसरिसी यादे अनकही
पल दो पल झुलसे बेवजह सी
कहानी
जो लिखी अस्क ने अस्क की
इश्क की लफ्जे बयाँ क्यु कहलाई
मुड के देखा जो हमने जिंदगी
जहां अपना बसेरा कही नही
निगाह में गिला की महक थी
और फिजा ने यादे भी ठुकरा दी
मिली जो अपना के राहे बहार की
सपनो जहां भी धुन्धलासा हंसे
चाह के भी तेरी तरह ये दिल
युही लागे जीना अब नसीब नही...
चल पुरानी वोह मोड पे मिल आये
याद की वोह कहानी वही छोड आये
छूटी कोई जिंदगी की साँस जी ले
वापस जिंदगी मै कही वही मोड आये
वह राह जरा घिरी घिरी
बहक रही बेवफा फिजा भी
ना मुडके देख अजनबी सी
जिन्दा हुई है लाशे बहार की
✍
सारिका ऐवले

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