थक जाओ जब तुम 
चलते चलते जिंदगी की राह पर तब
पाने को थोड़ा सा सुकूं पास मेरे चले आना.....

जब मायूस हो जाओ 
अपनों से और कहीं बिखर जाओ तो
सिमटने का ले कर जुनूं पास मेरे चले आना....

जब मन तुम्हारा कहीं 
ना लगे और दीवारों से सर टकराने 
लगो तब लेने को पनाह पास मेरे चले आना.... 

जब भरी महफ़िल में 
खुद को तन्हा पाने लगो तो मुझमें
हो जाने को फना तुम पास मेरे चले आना....

जब कोई चोट खाई 
हो और जख़्म भी ज़रा हरा हो तो,
लगवाने को मरहम तुम पास मेरे चले आना....

भरोसा उठ चुका हो
जब और दिल पर खाए नश्तर हो,
इश्क-ए-करम पाने तुम पास मेरे चले आना....

टूटा हो कोई कहर 
तुम पर और कोई ठिकाना न बचे,
तो पाने को आशियां तुम पास मेरे चले आना....

भूल कर सब बीती
बातें दूर करने को सारी दूरियाँ जो
थी दोनों के दरमियां ,तुम पास मेरे चले आना....

माना कि संगदिल है ये दुनिया,
मगर मोहब्बत तुम्ही से सच्ची 
है ,आज़माने ही सही तुम पास मेरे चले आना....

तुम से जुदाई को
सहा हम ने बरसों और खामोश 
रहें ,अब देने को जुबां तुम पास मेरे चले आना..


संध्या पंवार राजस्थान.