चंदन की खुशबू जब फैली।
मन खिल गुलज़ार हो गया।
होली जो आई रंगों की। 
रंगीन सारा संसार हो गया।

चारों तरफ़ खुशियाँ ही खुशियाँ हो।
उड़े रंग अबीर-गुलाल। 
साल में आये एक बार।
रंग लो दिलों को प्यार के रंगों से हर बार।

लग गले एकदूजे के।
निभा लो भाई चारा।
उत्साह भर लो नयी प्रीत का।
फ़ासला कम कर भेदभाव मिटा दो सारा।

शिद्दत हो गयी देखे हुए। 
एक नया मुल्क अपना।
जहाँ रंगों में सब एक साथ घुल मिल कर ।
हो एक जगह पूरा हो ये सपना।

होली को हल्ला बोल दो।
जला दो भ्रमित मन की मलिन।
आगे बढ़कर सब सम्भाल लेना। 
अपने देश के कल को बना लो शालीन।



           नीलम गुप्ता