जीवन के लम्हों को जीना है हमको
हर मुश्किलों से गुजरना है हमको
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फूलों को चुनना है,कांटों पर चलना है
हर दुख को हमें सहन करना है
हर ख्वाहिश को,सीने में दबा कर
सफलता के सौपानो पर चढ़ना है हमको
सतमार्ग पर चलकर,मंजिल को है पाना
माता-पिता, गुरुजनों का मान है बढ़ाना
मुझे अपने जीवन में,यही रीत है अपनाना
असंभव को मुझे,संभव करके है दिखाना
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जीवन के लम्हों को जीना है हमको
हर मुश्किलों से गुजरना है हमको
✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)
(मेरी डायरी के पुराने पन्नों से, जब मैं कक्षा दसवीं में थी😊 मेरे जीवन की पहली कविता)

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