मुरली वाले ने घेर लयी, 
सखि री,पनघट पे भौर भयी,
मुरली वाले ने..... 
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
घिररी डारी कांसे की गगरी, 
गगरी मोरी छूट गयी, 
पनघट पे भौर.....
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ऊँची नीची है पथ डगरिया, 
नीर मोरो छलकत जाये, 
पनघट पे भौर.....
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सिर पर घड़ा घड़े पर गगरी, 
गगरी मोरी फोड़ दयी, 
पनघट पे भौर.....
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भीगी फरिया भीगी चुनरिया,
चोली मोरी भीग गयी, 
पनघट पे भौर.....
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श्याम रंग रंगीली चुनरिया,
हियरा धर धरकत जाये, 
पनघट पे भौर..... 
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
श्याम रंग में रंग गयी मैं तो, 
सखियाँ निहारत जायें, 
पनघट पे भौर.....
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
मुरली वाले ने घेर लयी, 
सखि री,पनघट पे भौर भयी,
मुरली वाले ने.....।

    काव्य रचना -रजनी कटारे 
         जबलपुर (म. प्र.)