मुरली वाले ने घेर लयी,
सखि री,पनघट पे भौर भयी,
मुरली वाले ने.....
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घिररी डारी कांसे की गगरी,
गगरी मोरी छूट गयी,
पनघट पे भौर.....
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ऊँची नीची है पथ डगरिया,
नीर मोरो छलकत जाये,
पनघट पे भौर.....
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सिर पर घड़ा घड़े पर गगरी,
गगरी मोरी फोड़ दयी,
पनघट पे भौर.....
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भीगी फरिया भीगी चुनरिया,
चोली मोरी भीग गयी,
पनघट पे भौर.....
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श्याम रंग रंगीली चुनरिया,
हियरा धर धरकत जाये,
पनघट पे भौर.....
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श्याम रंग में रंग गयी मैं तो,
सखियाँ निहारत जायें,
पनघट पे भौर.....
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मुरली वाले ने घेर लयी,
सखि री,पनघट पे भौर भयी,
मुरली वाले ने.....।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर (म. प्र.)

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