राजस्थानी माटी में शौर्य,पराक्रम का
जज्बा कूट-कूट कर भरा है
शान सिर्फ राणा ही नहीं,इतिहास चेतकों, शुभ्ररकों से भरा पड़ा है
सुनी है सबने चेतक की वीर गाथा
आओ सुनाऊँ स्वामिभक्ति की पराकाष्ठा
उदयगढ़ के राणा कर्ण सिंह
शुभ्ररक उनको प्राण से प्यारा था
ईरानी मूल का घोटक, धवल
श्वेतवर्णी नयनों का तारा था
चाल थी ऐसी उसकी मानो
बातें हवा से करता था
बिना कहे ही राणा के
हर इशारे वो समझता था
काल हुआ विपरीत
मातृभूमि पर विपदा आयी
उदयगढ़ की धरती पर
ऐबक ने की चढ़ाई
हुआ भयंकर समर,
राजपूत प्राणों पर खेले
दस-दस मुगलों पर भारी
एक-एक राजपूत अकेले
हुआ दुर्भाग्य प्रबल,
शत्रु हुए रण पर भारी
बना लिए राणा ,हमारे युद्ध के बंदी
पड़ी नजर जो शुभ्ररक पर
लोभवश लाहौर ले आया
हुआ मुदित उस पर,जो
कपट से हाथ फिराया
देख पराया स्पर्श, शुभ्ररक का
ह्रदय विदीर्ण हो गया
पैर उठाकर मारी दुलत्ती
ऐबक भूमि पर क्षीण हो गया
भर उठा अपमान से ऐबक
जो कुछ करने की मानी
खेल-खेल में राणा को
जान से मारने की ठानी
बुला लिया प्रांगण में,खेल एक खेलेंगे
काटकर सिर तेरा,हम प्रतिशोध लेंगे
देखकर बंदी राणा को
शुभ्ररक जार-जार रोया
देखकर स्वामी की दशा
धैर्य एक पल न खोया
ठाना मन में लिया फैसला
फिर देखा राणा की ओर
राणा ने सुन लिया मौन को
दिया आश्वासन कठोर
हे स्वामीभक्त,हे परमवीर
तुम दुश्मन को दो ललकार
बस तुम आगे बढ़ो वीर
मैं भी हूँ यहाँ तैयार
हुआ अचानक वार
ऐबक भूमि पर पड़ा था
ऐबक की गर्दन पर
शुभ्ररक अड़ा खड़ा था
मार-मार दुलत्ती,
प्राण उसके हर लिया
पल भर में प्रतिशोध,
शुभ्ररक ने ले लिया
किया सवार राणा को
शुभ्ररक दौड़ पड़ा था
सरपट भागा वीर
एक पल नहीं रुका था
लाहौर से जो चला
सीधा उदयगढ़ महल रुका था
एक पल को भी न
उसने आराम किया था
उतरे महल जो राणा
शुभ्ररक खूब दुलारे
पर हाय रे! शुभ्ररक
स्वामीनिष्ठा में तूने प्राण ही हारे
हुआ मान तुझ पर
दिया मान- सम्मान,
अमर हो गया शुभ्ररक देकर अपनी जान
यही है गाथा मातृभूमि पर
मरने वालों की
तज कर अपने प्राण
मातृभूमि बचाने वालों की।।
राजस्थान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। ऐसी वीर भूमि को मेरा शत -शत नमन, अभिनंदन🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼
आशा झा सखी✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼

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