"फूलों में फूल हूँ, गुलाब की कली हूँ,
बच्चों और बुजुर्गो हर एक की पसंद हूँ।
जवां दिल हो या हो बचपना
हर एक के होठों मुस्कान की लड़ी हूँ।
फूलों में फूल...
श्री कृष्ण चरणों की मैं हूँ दासी
प्रेमियों के उपहार की मैं हूँ ख्वाहिश।
हर जवां दिलों की हूँ मैं धड़कन।
फूलों में फूल....
खुशियाँ हो या गम सबको मैं भाता।
शादी में वरमाला, 
स्वागत में क़दमों तले बिछ जाता।
शहीदों की अर्थी पर जा कर कदम चूम आता
फूलों में फूल....
सबसे अलग हूँ मैं सबसे अनोखा।
पाँव तले कुचल कोई देता है धोखा।
खुशबू ही दूँ,चाहे दिल मेरा रोता।
फूलों में फूल...
दिलों को चुरा, ओढू मासुमियत का चोला।
फिजाओं की खुशबू, से है दिल डौला,
मैं उसे चाहूं जो दिल का हो भोला।
फूलों में फूल...
उन्मुक्त हूँ स्वच्छंद हूँ पवित्र हूँ 
दिल की हूँ धड़कन,
मैं हूँ खुशियों की आरज़ू।
फूलों में फूल...।।"


    अम्बिका झा ✍️