यह दुनिया अजब गजब कहां तक बच पाओगे
 इसके निराले हैं ढंग 
 सुंदर फूल के साथ कांटो का उपहार 
 जीवन सुख दुख का संसार 
 ऊंचे ऊंचे पहाड़ मानो, छू रहे हो आसमां
 कह रही हो मानो ,मानव जन्म मिला है तुमको
  छू लो तुम आसमां
 निकलते हैं उनसे मीठे झरने 
 भर लो अपने जीवन में मिठास 
  समुद्र की अथाह गहराई 
  मानो कह रही हो, भर लो जीवन मेंअथाह प्रेम का सागर                                               ‌   दुनिया अजब गजब इस के खेल निराले  ।    
  तपता सूरज दे जाता ,दुनियां को यह संदेश 
   तप तप कर कुंदन बने जीवन, सुंदरता का परिवेश
   चंदा देकर शीतलता ,मन को बहुत लुभा जाता।
   कहीं निकलता लावा जमीन से 
   कहीं ठंड से कांपे  लोग 
   खदानों में हीरे मोती भरे 
   अटूट सौंदर्य से धरती सजे 
   मानव का व्यवहार निराला
    किसी में प्यार किसी में गुस्सा असीम भरा।
    यह दुनिया अजब गजब कहां तक बचोगे
    इसके निराले हैं ढंग,अनोखे है रंग
                        दिल की कलम से 


                        मधु अरोड़ा