जीवन से पहले मृत्यु के बाद
 न था किसी का साथ 
 गर्भावस्था में  विचर रहा था
  बंद गलियारे में भटक रहा था 
  परमपिता को याद कर
   दिल से मै पुकार रहा था 
   वादा कर रहा था 
   बाहर निकल 
   ना भूलूंगा तुझको प्रभु
   बाहर आया
   धीरे-धीरे दुनिया में रमता गया
    कौल    करा जो गर्भकाल में
    बाहर आ बिसराया था 
    लग गया जीवन को जीने में 
     हर पल हर क्षण करता रहा 
     कुछ कहता रहा, कुछ सुनता रहा
      मनमानी में करता रहा
       सोचता मैं कुछ था
      होता कुछ और था
       समझ से मेरी बाहर था 
        कर्मों का मायाजाल था 
       आया बुढ़ापा क्षीण  हो गई काया
        जर्जर हो रहा शरीर 
         चल दिया परमात्मा से मिलने को
         नहीं पता जीवन से पहले क्या था
         मरने के बाद क्या होगा 
ये  चिरकाल से यह सफर चलता रहा  चलता रहेगा        ‌   ‌‌        
आत्मा अजर अमर अविनाशी 
           देह की अपनी गति न्यारी।
                                दिल की कलम से


                                मधु अरोड़ा