रिया अपनी गर्मियों की छुट्टियां लगभग ऐसे ही गुजारने लगी।रिया को निशांत की वो सांवली सूरत भी भाने लगी थी।
निशांत इस साल बारहवीं क्लास पास करके कोलेज में जाने वाला था।अब यह सिलसिला आगे बढ़ चुका था। रिया की सहेलियों भी उस अजनबी के किस्से से वाकिफ थी।कोलेज खुल चुके थे। इस साल रिया की सहेली दीप्ति भी कोलेज जाने वाली थी। जिसका उत्साह रिया और पारूल पर भी चढ़ गया था। भले ही रिया और पारूल स्कूल में थी। पर स्कूल के बाद घंटो बैठ कर तीनों कालेज और जहांन भर की गप्पे मारा करतीं और खूब हैं करतीं।तीनों मिलकर घंटों चर्चा करतीं। कालेज के पहले दिन ही प्यार न हो ऐसा कम ही होता है। बाली उमर पर प्यार के छींटे पड़ ही जातें हैं। 
अब तो दीप्ति को भी कोलेज पसंद आने लगा। उसे भी किसी से प्यार हो गया। दीप्ति अपने कोलेज के किस्से सुनाती और रिया अपने छत वाले। अब तो निशांत भी स्कूल में टाइम पर नज़र आने लगा। निशांत ने रिया को देखने के लिए सुबह की सैर शुरू की। और रिया साइकिल से टंस्कूल जा रही होती और निशांत सैर से वापिस आ रहा होता था। दोनों एक दूसरे को देखते। निगाहें मिलतीं। और बिजलियां गिरती सुबह सुबह एक दूसरे पर। जिसका असर वह दोनों ही जानते थे।
उधर दीप्ति का आर्कषण अपने एक तरफा प्यार के किस्से गढ़ रहा था। शहर में मेला लगा हुआ था। पारूल का प्रोग्राम तो नहीं बना मेले में जाने का। लेकिन रिया और दीप्ति साइकिल पर ही चलीं गईं। और उन्हें सामने से निशांत आता दिखाई दिया। वो भी साइकिल से कहीं जा रहा था। उसे देख कर रिया के मन में तो लड्डू फूटने लगे। रिया ने आगे जाती हुई दीप्ति को आवाज लगाई कि यह वोही छत वाला लड़का है। और उधर दीप्ति भी उसे निशांत के लिए बताना चाहती थी। कि कोलेज वाला लड़का यही है। 
इतफाक से दोनों को प्यार भी हुआ तो एक ही लड़के से।।।।  



  क्रमशः
  संकलन:::     



                            🌟मनु✍🏻